Karṇa-vadha-pratyaya: Yudhiṣṭhira’s Verification of Karṇa’s Fall (कर्णवध-प्रत्ययः)
क्रुद्धोर्जुनो अभिदुद्राव व्याक्षिपन् गाण्डिवं धनु: । इस प्रकार सेनाओंकी व्यूह-रचना हो जानेपर रणभूमिमें संशप्तकोंकी ओर देखकर क्रोधमें भरे हुए अर्जुनने गाण्डीव धनुषकी टंकार करते हुए उनपर आक्रमण किया ।। ७६ || अथ संशप्तका: पार्थमभ्यधावन् वधैषिण:
sañjaya uvāca
kruddho 'rjuno 'bhidudrāva vyākṣipan gāṇḍīvaṃ dhanuḥ |
atha saṃśaptakāḥ pārtham abhyadhāvan vadhaiṣiṇaḥ ||
क्रोध से भरे अर्जुन गाण्डीव धनुष को घुमाते हुए दौड़ पड़े। सेनाओं की व्यूह-रचना हो जाने पर रणभूमि में संशप्तकों की ओर देखकर पार्थ ने गाण्डीव की टंकार करते हुए उन पर धावा बोला। तब वध की इच्छा रखने वाले संशप्तक भी पार्थ पर टूट पड़े।
संजय उवाच