अस्त्रयुद्धे द्रौणिपार्थसंघर्षः — Karṇa’s Bhārgavāstra and the Search for Yudhiṣṭhira
Chapter 45
एष संशप्तकाहूतस्तानेवाभिमुखो गत: । करोति कदन चैषां संग्रामे द्विषतां बली,“यह देखो, संशप्तकोंकी ललकार सुनकर महाबली अर्जुन उन्हींकी ओर चल पड़े और अब संग्राममें उन शत्रुओंका संहार कर रहे हैं!
eṣa saṁśaptakāhūtas tān evābhimukho gataḥ | karoti kadanaṁ caiṣāṁ saṅgrāme dviṣatāṁ balī ||
“देखो! संशप्तकों की ललकार सुनकर महाबली अर्जुन उन्हीं की ओर अभिमुख होकर गया है और संग्राम में उन शत्रुओं का संहार कर रहा है।”
संजय उवाच