कर्णेन सैन्यस्थापनं तथा नानायुद्धसमवायः
Karna Reforms the Host and Multiple Duels Converge
ध्रुव: सर्वाणि भूतानि विष्णु: पाति जनार्दन: । महाराज! राक्षस, पिशाच और गुह्मक--ये गिरिराज हिमालय तथा गन्धमादन पर्वतकी रक्षा करते हैं और अविनाशी एवं सर्वव्यापी भगवान् जनार्दन समस्त प्राणियोंका पालन करते हैं (परंतु बाहीक देशपर किसी भी देवताका विशेष अनुग्रह नहीं है)
महाराज! ध्रुव समस्त भूतों को धारण करता है और विष्णु—जनार्दन—सबका पालन करते हैं। राक्षस, पिशाच और गुह्यक गिरिराज हिमालय तथा गन्धमादन पर्वत की रक्षा करते हैं, और अविनाशी, सर्वव्यापी भगवान् जनार्दन समस्त प्राणियों का पोषण करते हैं; (पर वाहीक देश पर किसी देवता का विशेष अनुग्रह नहीं है)।
कर्ण उवाच