कर्णेन सैन्यस्थापनं तथा नानायुद्धसमवायः
Karna Reforms the Host and Multiple Duels Converge
न चैवास्मात् प्रमोक्षध्वं घोरात् पापान्नराधमा: । “मैं अभी बालिका हूँ और मेरे भाई-बन्धु मौजूद हैं तो भी तुमलोगोंने अधर्मपूर्वक मेरे साथ समागम किया है। इसलिये इस कुलकी सारी स्त्रियाँ व्यभिचारिणी होंगी। नराधमो! तुम्हें इस घोर पापसे कभी छुटकारा नहीं मिलेगा”
नराधमो! तुम इस घोर पाप से कभी छूट नहीं पाओगे। मैं अभी बालिका हूँ और मेरे भाई-बन्धु उपस्थित हैं, फिर भी तुमने अधर्मपूर्वक मेरे साथ समागम किया है। इसलिए इस कुल की सारी स्त्रियाँ व्यभिचारिणी होंगी।
कर्ण उवाच