कर्णपरर्वणि त्रयोचत्वारिंशदध्यायः (Karṇa-parva Adhyāya 43) — Kṛṣṇa’s Battlefield Assessment and the Reversal Around Bhīma
धाना गौड्यासवं पीत्वा गोमांसं लशुनैः सह । अपूपमांसवाट्यानामाशिन: शीलवर्जिता:
dhānā gauḍyāsavaṃ pītvā gomāṃsaṃ laśunaiḥ saha | apūpamāṃsavaṭyānām āśinaḥ śīlavarjitāḥ ||
वे गुड़ से बनी मदिरा पीकर और भुने हुए धान्य खाकर, लहसुन के साथ गोमांस भी खाते हैं। पुए, मांस और वाटी खाने वाले वे लोग शील और आचार से रहित हैं।
कर्ण उवाच