Adhyāya 41 — Kṛṣṇa’s Battlefield Briefing and the Renewal of the Great Engagement
अस्यार्थसिद्धि त्वभिकाड्क्षमाण- स्तन्मन्यसे यत्र नैकान्त्यमस्ति । “यह बड़ा भयंकर समय सामने आ रहा है। राजा दुर्योधन रणभूमिमें आ पहुँचा है। मैं उसके मनोरथकी सिद्धि चाहता हूँ; किंतु तुम्हारा मन उधर लगा हुआ है
यह अत्यन्त भयंकर समय सामने आ रहा है। राजा दुर्योधन रणभूमि में आ पहुँचा है। मैं उसके मनोरथ की सिद्धि चाहता हूँ; पर तुम्हारा मन उस ओर लगा है जहाँ उसके कार्य की सिद्धि का कोई निश्चय नहीं।
संजय उवाच