शौरे रथं वाहयतोअर्जुनस्य बल॑ महास्त्राणि च पाण्डवस्य । अहं विजानामि यथावदद्य परोक्षभूतं तव तत् तु शल्य,“मद्रराज! अर्जुनका रथ हाँकनेवाले श्रीकृष्णके बल और पाण्डुपुत्र अर्जुनके महान् दिव्यास्त्रोंकी इस समय मैं भलीभाँति जानता हूँ। तुम स्वयं उनसे अपरिचित हो
मद्रराज! अर्जुन का रथ हाँकने वाले शौरी श्रीकृष्ण का बल और पाण्डुपुत्र अर्जुन के महान् दिव्यास्त्र—इन सबको मैं इस समय यथार्थ रूप से जानता हूँ; पर तुम उनसे अपरिचित हो।
संजय उवाच