कर्णपर्व — अध्याय ४०
Karṇa’s Pressure on the Pāñcālas; Duryodhana Disabled; Arjuna’s Counter-Advance
अविषहा: समुद्रो हि बहुसत्वगणालय: । महासत्त्वशतोद्धासी नभसो5पि विशिष्यते,कौआ सोचने लगा, “मैं थक जानेपर इस जलराशिमें कहाँ उतरूँगा? बहुत-से जल- जन्तुओंका निवासस्थान समुद्र मेरे लिये असहाय है। असंख्य महाप्राणियोंसे उद्धासित होनेवाला यह महासागर तो आकाशसे भी बढ़कर है”
कौआ सोचने लगा— “थक जाने पर इस जलराशि में मैं कहाँ उतरूँगा? बहुत-से जल-जन्तुओं का निवासस्थान यह समुद्र मेरे लिए असहाय है। असंख्य महाप्राणियों से उद्धासित यह महासागर तो आकाश से भी बढ़कर है।”
हंस उवाच