कर्णपर्व — अध्याय ४०
Karṇa’s Pressure on the Pāñcālas; Duryodhana Disabled; Arjuna’s Counter-Advance
तमाद्दयत दुर्बद्धि: पताव इति पक्षिणम् । फिर वह जूठनपर घमंड करनेवाला कौआ इन हंसोंमें सबसे श्रेष्ठ कौन है? यह जाननेकी इच्छासे उड़कर उनके पास गया और दूरतक उड़नेवाले उन बहुसंख्यक हंसोंमेंसे जिस पक्षीको उसने श्रेष्ठ समझा, उसीको उस दुर्बुद्धिने ललकारते हुए कहा--“चलो, हम दोनों उड़ें!
tam ādadāya durbuddhiḥ patāv iti pakṣiṇam |
संजय बोले—जूठन पर घमंड करने वाला वह दुर्बुद्धि कौआ “इन हंसों में सबसे श्रेष्ठ कौन है?” यह जानने की इच्छा से उड़कर उनके पास गया। दूर तक उड़ने वाले उन बहुसंख्यक हंसों में से जिस पक्षी को उसने श्रेष्ठ समझा, उसी को ललकारकर बोला—“चलो, हम दोनों उड़ें!”
संजय उवाच