Aśvatthāman’s Arrow-Screen and the Confrontation with Yudhiṣṭhira (द्रौणि–युधिष्ठिर-संग्रामः)
तेनाहमिषुणा शल्य वासुदेवधनंजयौ । योत्स्ये परमसंक्रुद्धस्तत् कर्म सदृ्शं मम,शल्य! मैं अत्यन्त कुपित होकर उस बाणके द्वारा श्रीकृष्ण और अर्जुनके साथ युद्ध करूँगा और वह कार्य मेरे योग्य होगा
tenāham iṣuṇā śalya vāsudeva-dhanañjayau | yotsye paramasaṃkruddhas tat karma sadṛśaṃ mama ||
हे शल्य! मैं अत्यन्त क्रोधित होकर उसी बाण के द्वारा वासुदेव श्रीकृष्ण और धनंजय अर्जुन से युद्ध करूँगा; वह कर्म मेरे ही योग्य होगा।
कर्ण उवाच