Kṛpa’s Archery Display; Śikhaṇḍin Checked; Suketu Slain; Dhṛṣṭadyumna–Kṛtavarmā Clash (कृपशौर्य–पार्षतहार्दिक्ययुद्धम्)
यत् त्वं प्रेरयसे वित्तं बहु तेन खलु त्वया । शक्यं बहुविधैर्यज्ञिर्यट्टं सूत यजस्व तै:
सूत! तुम जो यहाँ बहुत-सा धन देने की घोषणा कर रहे हो, निश्चय ही उससे नाना प्रकार के यज्ञ किए जा सकते हैं; अतः उन धन-वैभवों से यज्ञों का ही अनुष्ठान करो।
शल्य उवाच