कर्णेन युधिष्ठिरानीकविदारणम् / Karṇa’s Breach of Yudhiṣṭhira’s Battle-Line
तस्य तुष्टो महादेवो भक्त्या च प्रशमेन च । ह्ृदगतं चास्य विज्ञाय दर्शयामास शड्कर:
उनकी भक्ति और मनःसंयम से संतुष्ट होकर महादेव ने उनके हृदयगत भाव को जान लिया और शंकर ने उन्हें अपने दिव्य स्वरूप का प्रत्यक्ष दर्शन कराया।
पितामह उवाच