कर्णेन युधिष्ठिरानीकविदारणम् / Karṇa’s Breach of Yudhiṣṭhira’s Battle-Line
श्रुत्वा चैतद् वचन्रित्रं हेतुकार्यार्थसंहितम् । कुरु शल्य विनिश्चित्य माभूदत्र विचारणा
शल्य! कारण और कार्य से युक्त इस विचित्र ऐतिहासिक वचन को सुनकर भली-भाँति निश्चय करके ही मेरा कार्य करो; इस विषय में तुम्हारे मन में कोई अन्यथा विचार न रहे।
पितामह उवाच