कर्णेन व्यूहविधानम् — Karṇa’s Battle Formation and the Pāṇḍava Counter-Plan
Adhyāya 31
न च त्वत्तो हि राधेयो न चाहमपि वीर्यवान् | वृणे<हं त्वां हयाग्रयाणां यन्तारमिह संयुगे
संजय बोले—आपकी अपेक्षा न तो राधेय कर्ण अधिक बलवान है और न मैं ही। आप उत्तम अश्वों के श्रेष्ठ सारथि हैं; इसलिए इस संग्राम में मैं आपका वरण करता हूँ।
संजय उवाच