Karna Reproves Shalya; Brahmin Reports on Bāhlīkas; Shalya’s Universalizing Rebuttal (कर्ण–शल्य संवादः)
तानब्रवीत् ततः कर्ण: क्रुद्धः सर्प इव श्वसन् | करं करेण निष्पीड्य प्रेक्षमाणस्तवात्मजम्,उस समय क्रोधमें भरकर फुफकारते हुए सर्पके समान कर्णने हाथ-से-हाथ दबाकर आपके पुत्रकी ओर देखते हुए उन कौरव वीरोंसे इस प्रकार कहा--
tān abravīt tataḥ karṇaḥ kruddhaḥ sarpa iva śvasan | karaṃ kareṇa niṣpīḍya prekṣamāṇas tavātmajam ||
तब कर्ण क्रोध से भरकर, फुफकारते हुए सर्प के समान, हाथ पर हाथ दबाए, आपके पुत्र की ओर दृष्टि टिकाकर, उन कौरव वीरों से इस प्रकार बोला।
संजय उवाच