अध्याय २९: कर्णस्य शल्यं प्रति शापस्मरणं च युद्धनिश्चयः | Chapter 29: Karṇa recalls curses to Śalya and declares resolve for battle
उन्होंने अपने तीखे बाणोंसे पताका, ध्वज और आयुधोंसहित गजों एवं गजारोहियोंको, घोड़ों और घुड़सवारोंको तथा पैदल मनुष्योंको भी यमलोक भेज दिया ।। तमन्तकमिव क्रुद्धमनिवार्य महारथम् | दुर्योधनो5भ्ययादेको निघ्नन् बाणैरजिह्दगै:,इस प्रकार क्रोधमें भरे हुए यमराजके समान अबाध गतिवाले महारथी अर्जुनपर सीधे जानेवाले बाणोंसे प्रहार करता हुआ अकेला दुर्योधन उनका सामना करनेके लिये गया
tam antakam iva kruddham anivārya-mahāratham | duryodhano 'bhyayād eko nighnan bāṇair ajihmagaiḥ ||
उन्होंने अपने तीखे बाणों से पताका, ध्वज और आयुधों सहित गजों एवं गजारोहियों को, घोड़ों और घुड़सवारों को तथा पैदल सैनिकों को भी यमलोक भेज दिया। फिर क्रोध में भरे यमराज के समान अबाधगामी महारथी दुर्योधन, सीधे जाने वाले बाणों से प्रहार करता हुआ, अकेला ही अर्जुन का सामना करने चला।
संजय उवाच