धर्मराजो महाशरक्ति प्राहिणोत् तव सूनवे । दीप्यमानां महावेगां महोल्कां ज्वलितामिव,दण्डधारी यमराजके समान उसे गदा उठाये देख धर्मराजने आपके उस पुत्रपर अत्यन्त वेगशालिनी महाशक्तिका प्रहार किया, जो प्रज्वलित हुई बड़ी भारी उल्काके समान देदीप्यमान हो रही थी
दण्डधारी यमराज के समान गदा उठाए हुए उसे देखकर धर्मराज ने तुम्हारे उस पुत्र पर अत्यन्त वेगशालिनी महाशक्ति का प्रहार किया, जो प्रज्वलित हुई भारी उल्का के समान देदीप्यमान हो रही थी।
संजय उवाच