Śalya’s Objection to Sārathya and Duryodhana’s Conciliation (शल्यमन्यु-प्रशमनम् / Sārathyāṅgīkāra)
प्राद्रवत् सहसा राजन् नकुलो व्याकुलेन्द्रिय: । अत्यन्त बलवान तथा अस्त्रविद्याके विद्वान् कर्णके द्वारा समरांगणमें आहत हो सहसा नकुल भाग चले। उस समय उनकी सारी इन्द्रियाँ व्याकुल हो रही थीं ।। ४४ ई ।। तमभिद्रुत्य राधेय: प्रहसन् वै पुनः पुन:
prādravat sahasā rājan nakulo vyākulendriyaḥ | atyanta-balavān tathā astravidyāyāṃ vidvān karṇena samara-aṅgaṇe āhataḥ sahasā nakulaḥ bhāga-cale | tasmin kāle tasya sarvendriyāṇi vyākulāni babhūvuḥ || tam abhidrutya rādhēyaḥ prahasan vai punaḥ punaḥ ||
संजय बोले—हे राजन्! नकुल सहसा भागा; उसकी इन्द्रियाँ व्याकुल हो उठीं। वह अत्यन्त बलवान और अस्त्रविद्या में निपुण होते हुए भी, रणभूमि में कर्ण के प्रहार से आहत होकर क्षणभर में ही मुड़कर पलायन कर गया। उसे वेग से भागते देखकर राधेय (कर्ण) बार-बार हँसता हुआ उसके पीछे दौड़ा।
संजय उवाच