Śalya’s Objection to Sārathya and Duryodhana’s Conciliation (शल्यमन्यु-प्रशमनम् / Sārathyāṅgīkāra)
अप्-#-#र- चतुर्विशो5ध्याय: नकुल और कर्णका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और पांचाल-सेनाका संहार संजय उवाच नकुलं रभसं युद्धे द्रावयन्तं वरूथिनीम् | कर्णो वैकर्तनो राजन् वारयामास वै रुषा,संजय कहते हैं--राजन! युद्धस्थलमें कौरव-सेनाको खदेड़ते हुए वेगशाली वीर नकुलको वैकर्तन कर्णने रोषपूर्वक रोका
sañjaya uvāca | nakulaṃ rabhasaṃ yuddhe drāvayantaṃ varūthinīm | karṇo vaikatano rājan vārayāmāsa vai ruṣā ||
संजय बोले—राजन्! रणभूमि में कौरव-सेना की व्यूह-रचना को वेग से खदेड़ते हुए नकुल को देखकर वैकर्तन कर्ण ने क्रोधपूर्वक उसे रोक दिया।
संजय उवाच