Adhyāya 18 — Sequential Duels and Formation Pressure
Ulūka–Yuyutsu; Śakuni–Sutasoma; Kṛpa–Dhṛṣṭadyumna; Kṛtavarmā–Śikhaṇḍin
अश्वास्तरपरिस्तोमान् राड़कवान् पतितान् भुवि । 'घुड़सवारोंकी ध्वजाओंके अग्रभागमें हाथियोंके सुनहरे कंबल उलझ गये हैं। घोड़ोंकी पीठपर बिछाये जानेवाले विचित्र
sañjaya uvāca |
aśvāstara-paristomān rāḍakavān patitān bhuvi |
संजय बोले—देखो, घोड़ों और खच्चरों के समृद्ध आवरण और साज-सामान धरती पर पड़े हैं। ध्वजाओं के अग्रभाग में हाथियों के सुनहरे कंबल उलझ गए हैं; और घोड़ों की पीठ पर बिछाए जाने वाले विचित्र, मणिजटित, सुवर्णभूषित रंकुमृग-चर्म के बने झूल और जीन भी भूमि पर गिर पड़े हैं।
संजय उवाच