कर्णपर्व — पञ्चदशोऽध्यायः | Karṇa Parva, Chapter 15: Pāṇḍya’s Advance and Aśvatthāmā’s Counterstroke
तमामन्त्रयैकमनसं केशवो द्रौणिमब्रवीत् । अश्वत्थामन् स्थिरो भूत्वा प्रहहाशु सहस्व च
तब भगवान् श्रीकृष्ण ने एकाग्रचित्त होकर द्रोणपुत्र से कहा— “अश्वत्थामा! स्थिर हो जाओ; शीघ्र प्रहार करो और जो प्रहार तुम पर हों, उन्हें भी सहन करो।”
संजय उवाच