कर्णपर्व — चतुर्दशोऽध्यायः
Arjuna’s Suppression of the Saṃśaptakas; Kṛṣṇa’s Strategic Admonition; Battlefield Inventory
तान्यस्त्रैरेव समरे प्रतिजघ्नेडथ पाण्डव: । दोनों ही युद्धस्थलमें एक-दूसरेको रथहीन कर देनेकी इच्छा करने लगे। तदनन्तर महारथी अभ्वत्थामाने बड़े-बड़े अस्त्र प्रकट किये; परन्तु पाण्डुपुत्र भीमसेनने समरांगणमें अपने अस्त्रोंद्वारा ही उन सबको नष्ट कर दिया
तदनन्तर महारथी अश्वत्थामा ने समर में बड़े-बड़े अस्त्र प्रकट किए; परन्तु पाण्डव ने अपने ही अस्त्रों द्वारा उन सबका प्रतिघात कर दिया।
संजय उवाच