Adhyāya 10: Śrutakarmā’s Engagements; Prativindhya–Citra Duel; Drauṇi Advances toward Bhīma
स्वमनीकमवस्थाप्य बाहुवीर्यमुपाश्रित: । युद्ध्वा च सुचिरं काल॑ पाण्डवै: सह भारत,भारत! इस प्रकार अपनी सेनाको स्थापित करके, जिन्हें अपना लक्ष्य प्राप्त हो गया था और इसीलिये जो बड़े हर्षके साथ परिश्रमपूर्वक युद्ध कर रहे थे, उन विपक्षी पाण्डवोंके साथ दुर्योधनने अपने ही बाहुबलके भरोसे दीर्घकालतक युद्ध करके संध्याकाल आनेपर सैनिकोंको शिविरमें लौटनेकी आज्ञा दे दी
svamanīkam avasthāpya bāhuvīryam upāśritaḥ | yuddhvā ca suciraṃ kālaṃ pāṇḍavaiḥ saha bhārata ||
भारत! अपनी सेना को सुव्यवस्थित करके और अपने बाहुबल पर भरोसा रखकर, दुर्योधन पाण्डवों के साथ बहुत देर तक युद्ध करता रहा।
संजय उवाच