कर्णसेनापत्यारम्भः — Karṇa’s Appointment and the Report to Dhṛtarāṣṭra
Chapter 1
ते मुहूर्त समाश्वस्य हेतुभि: शास्त्रसम्मितै: । रात्यागमे महीपाला: स्वानि वेश्मानि भेजिरे,वे शास्त्रानुकूल युक्तियोंद्वारा दो घड़ीतक अश्वत्थामाको सान्त्वना देते रहे। फिर रात हो जानेपर समस्त भूपाल अपने-अपने शिविरमें चले गये इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि जनमेजयवाक्यं नाम प्रथमो5ध्याय:
te muhūrtaṃ samāśvasya hetubhiḥ śāstra-sammitaiḥ | rātry-āgame mahīpālāḥ svāni veśmāni bhejire ||
वे शास्त्रसम्मत युक्तियों से थोड़ी देर धैर्य धारण कर, रात होने पर वे भूपाल अपने-अपने निवास (शिविर) को चले गये। इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि ‘जनमेजयवाक्य’ नाम प्रथम अध्याय।
वैशम्पायन उवाच