कर्णसेनापत्यारम्भः — Karṇa’s Appointment and the Report to Dhṛtarāṣṭra
Chapter 1
उस युद्धमें शत्रुओंका महान् संहार करके कर्ण धृतराष्ट्रपुत्रोंक देखते-देखते अर्जुनके हाथसे मारा गया ।। ततस्तु संजय: सर्व गत्वा नागपुरं द्रुतम् आचष्ट धृतराष्ट्राय यद् वृत्तं कुरुजाड़ले,तदनन्तर संजयने तुरंत हस्तिनापुरमें जाकर कुरुक्षेत्रमें जो घटना घटित हुई थी, वह सब धृतराष्ट्रसे कह सुनायी
vaishampāyana uvāca | tasmin yuddhe śatrūṇāṁ mahān saṁhāraṁ kṛtvā karṇaḥ dhṛtarāṣṭraputrāṇāṁ paśyatāṁ paśyatām arjunena hastena hataḥ || tataḥ tu sañjayaḥ sarvaṁ jñātvā nāgapuraṁ drutam gatvā dhṛtarāṣṭrāya ācacakṣe yad vṛttaṁ kurujaṅgale ||
उस युद्ध में शत्रुओं का महान संहार करके कर्ण, धृतराष्ट्र-पुत्रों के देखते-देखते अर्जुन के हाथ से मारा गया। तत्पश्चात संजय सब कुछ जानकर शीघ्र हस्तिनापुर पहुँचा और कुरुजाङ्गल (कुरुक्षेत्र) में जो कुछ घटित हुआ था, वह सब धृतराष्ट्र को कह सुनाया।
वैशम्पायन उवाच