Droṇa-parva Adhyāya 94: Sātyaki–Sudarśana Yuddha (सात्यकि–सुदर्शन युद्ध)
पतमानस्तु स बभौ पर्णाशाया: प्रिय: सुतः । स भग्न इव वातेन बहुशाखो वनस्पति:,गिरते समय पर्णाशाके प्रिय पुत्र श्रुतायुध आँधीके उखाड़े हुए अनेक शाखाओंवाले वृक्षके समान प्रतीत हो रहे थे
patamānas tu sa babhau parṇāśāyāḥ priyaḥ sutaḥ | sa bhagna iva vātena bahuśākho vanaspatiḥ ||
संजय बोले—गिरते समय पर्णाशा का प्रिय पुत्र श्रुतायुध आँधी से टूटे हुए बहुशाखी वृक्ष के समान प्रतीत हो रहा था।
संजय उवाच