द्रोण–सात्यकि-युद्धम्
Droṇa–Sātyaki Engagement
जयद्रथवधरप्रेप्सुमायान्तं पुरुषर्षभम् । न्यवारयन्त सहिता: क्रिया व्याधिमिवोत्थितम्,जैसे चिकित्साकी क्रिया उभड़ते हुए रोगको रोक देती है, उसी प्रकार जयद्रथका वध करनेकी इच्छासे आते हुए पुरुषश्रेष्ठ अर्जुनको समस्त कौरव-वीरोंने एक साथ मिलकर रोक दिया
जयद्रथ-वध की अभिलाषा से आते हुए पुरुषश्रेष्ठ अर्जुन को समस्त कौरव-वीरों ने एक साथ मिलकर वैसे ही रोक लिया, जैसे चिकित्सा की क्रिया उभड़ते हुए रोग को रोक देती है।
संजय उवाच