द्रोण–सात्यकि-युद्धम्
Droṇa–Sātyaki Engagement
कर्णेन विजिता: पूर्व संग्रामे शूरसम्मता: । भारद्वाजं पुरस्कृत्य हृष्टात्मानो<र्जुनं प्रति,इनके पीछे दस हजार रथी, अभीषाह, शूरसेन, शिबि, वसाति, मावेल्लक, ललित्थ, केकय, मद्रक, नारायण नामक गोपालगण तथा काम्बोजदेशीय सैनिकगण भी थे। इन सबको पूर्वकालमें कर्णने रणभूमिमें जीतकर अपने अधीन कर लिया था। ये सब-के-सब शूरवीरोंद्वारा सम्मानित योद्धा थे और प्रसन्नचित्त हो द्रोणाचार्यको आगे करके अर्जुनपर चढ़ आये थे
sañjaya uvāca |
karṇena vijitāḥ pūrvaṃ saṅgrāme śūrasammatāḥ |
bhāradvājaṃ puraskṛtya hṛṣṭātmāno 'rjunaṃ prati ||
वे पहले संग्राम में कर्ण द्वारा जीते गए और शूरों में मान्य थे; हर्षित-चित्त होकर भारद्वाजपुत्र द्रोण को आगे रख, अर्जुन की ओर बढ़े।
संजय उवाच