द्रोणपर्व — द्विनवति-तमोऽध्यायः
Sātyaki Pressed by Kauravas; Duryodhana and Kṛtavarmā Engagements
ह्रादेन गजघण्टानां शड्खानां निनदेन च । ज्याक्षेपनिनदैश्वैव विरावेण च दन्तिनाम्,हाथियोंके घंटोंकी ध्वनि, शंखनाद, धनुषकी टंकार और गजराजोंके चिग्घाड़नेके शब्दसे पृथ्वी, दिशाएँ तथा आकाश--ये सभी गूँज उठे थे। उस समय दुःशासन दो घड़ीके लिये अत्यन्त भयंकर एवं दारुण हो उठा
हाथियों के घंटों की ध्वनि, शंखनाद, धनुष की टंकार और गजराजों के चिग्घाड़ने से पृथ्वी, दिशाएँ और आकाश—सब गूँज उठे।
संजय उवाच