द्रोण–धृष्टद्युम्नयुद्धवर्णनम्
Drona–Dhrishtadyumna Battle Description
त्रि:सप्तकृत्व: पृथिवीं कृत्वा नि:क्षत्रियां प्रभु: इष्ट्वा क्रतुशतैर्वीरो ब्राह्मणेभ्यो हुमन्यत,वीर एवं शक्तिशाली परशुरामजीने इक्कीस बार इस पृथ्वीको क्षत्रियोंसे शून्य करके सैकड़ों यज्ञोंद्वार भगवानूका यजन किया और इस वसुधाको ब्राह्मणोंके अधिकारमें दे दिया
नारद ने कहा—उस प्रभु वीर ने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रियों से शून्य करके, सैकड़ों यज्ञों द्वारा यजन किया और इस वसुंधरा को ब्राह्मणों के अधीन मानकर (उन्हें) समर्पित कर दिया।
नारद उवाच