Subhadrā-vilāpaḥ — Subhadrā’s Lament for Abhimanyu
Droṇa-parva 55
तां निरीक्ष्याब्रवीद् वाक््यं पर्वत: प्रहसन्निव । कस्येयं चड्चलापाज़ी सर्वलक्षणसम्मता,तब महर्षि पर्वतने उस कन्याकी ओर देखकर हँसते हुए-से कहा--'राजन्! यह समस्त शुभ लक्षणोंसे सम्मानित चंचल कटाक्षवाली कन्या किसकी पुत्री है?
tāṃ nirīkṣyābravīd vākyaṃ parvataḥ prahasann iva | kasye yaṃ cañcalāpāṅgī sarvalakṣaṇasammatā ||
तब महर्षि पर्वत ने उस कन्या की ओर देखकर, मानो हँसते हुए कहा—“राजन्! समस्त शुभ लक्षणों से युक्त, चंचल कटाक्षवाली यह कन्या किसकी पुत्री है?”
व्यास उवाच