जयद्रथवध-प्रतिज्ञा
Arjuna’s Vow to Neutralize Jayadratha
महेन्द्रशत्रवो येन हिरण्यपुरवासिन: । अक्ष्णोनिमिषमात्रेण पौलोमा: सगणा हता:,“जो लोभरहित, बुद्धिमान, लज्जाशील, क्षमावान्, रूपवान, बलवान, सुन्दर शरीरधारी, दूसरोंको मान देनेवाले, प्रीतिपात्र, वीर तथा सत्यपराक्रमी हैं, जिनके कर्मोकी देवतालोग भी प्रशंसा करते हैं, जिनके कर्म सबल एवं महान् हैं, जिन पराक्रमी वीरने निवातकवचों तथा कालकेय नामक दैत्योंका विनाश किया था, जिन्होंने आँखोंकी पलक मारते-मारते हिरण्यपुरनिवासी इन्द्रशत्रु पौलोम नामक दानवोंका उनके गणोंसहित संहार कर डाला था तथा जो सामर्थ्यशाली अर्जुन अभयकी इच्छा रखनेवाले शत्रुओंको भी अभयदान देते हैं, उन्हींके बलवान् पुत्रकी भी हमलोग रक्षा नहीं कर सके
sañjaya uvāca |
mahendraśatravo yena hiraṇyapuravāsinaḥ |
akṣṇonimiṣamātreṇa paulomāḥ sagaṇā hatāḥ ||
संजय बोले—उसी ने हिरण्यपुर में रहने वाले महेन्द्र के शत्रु पौलोमों को उनके गणों सहित, केवल पलक झपकते ही मार डाला था।
संजय उवाच