अभिमन्योर् विक्रमः — Abhimanyu’s Disruptive Advance and the Gāndharva-astra Counter
स्रग्भिरा भरणैर्वस्त्रै: पातितैश्न महाभुजै: । वर्मभिश्नर्मभिहरिर्मुकुटैश्छत्रचामरै:,काटकर गिराये हुए हार, आभूषण, वस्त्र, विशाल भुजा, कवच, ढाल, मनोहर मुकुट, छत्र, चँवर, आवश्यक सामग्री, रथकी बैठक, ईषादण्ड, बन्धुर, चूर-चूर हुई धुरी, टूटे हुए पहिये, टूक-टूक हुए जूए, अनुकर्ष, पताका, सारथि, अश्व, टूटे हुए रथ और मरे हुए हाथियोंसे वहाँकी सारी पृथ्वी आच्छादित हो गयी थी
saṛgbhir ābharaṇair vastraiḥ pātitaiś ca mahābhujaiḥ | varmabhiś carmabhiḥ śubhair mukuṭaiś chatra-cāmaraiḥ ||
संजय बोले—वहाँ की पृथ्वी गिरे हुए हारों, आभूषणों और वस्त्रों से, कटे हुए महाबाहुओं से, उत्तम कवचों और ढालों से, तथा मनोहर मुकुटों, छत्रों और चँवरों से ढँक गयी थी।
संजय उवाच