Adhyāya 40 (Book 7, Droṇa-parva): Abhimanyu’s Rapid Advance and Battlefield Disruption
जगाम सह पुड्खेन वल्मीकमिव पन्नग: । अथैनं पज्चविंशत्या पुनरेव समार्पयत्,वह बाण तुरंत ही उसके वक्ष:स्थलपर पहुँचकर उसके गलेकी हँसलीको विदीर्ण करता हुआ पंखसहित भीतर घुस गया, मानो कोई सर्प बाँबीमें समा गया हो। तत्पश्चात् अभिमन्युने दुःशासनको पचीस बाण और मारे
वह बाण पंख सहित तुरंत उसके वक्षःस्थल पर पहुँचकर उसके गले की हँसली को विदीर्ण करता हुआ भीतर घुस गया—मानो कोई सर्प बाँबी में समा गया हो। तत्पश्चात् अभिमन्यु ने दुःशासन पर पचीस बाण और चलाए।
संजय उवाच