अभिमन्युना दुःशासनस्य ताडनम्
Abhimanyu’s Rebuke and Wounding of Duḥśāsana; Karṇa’s Counter-volley
ग्रसिष्याम्यद्य सौभद्रं यथा राहुर्दिवाकरम् । उत्क्कुश्य चाब्रवीद् वाक््यं कुरुराजमिदं पुन:,'जैसे राहु सूर्यपर ग्रहण लगाता है, उसी प्रकार आज मैं सुभद्राकुमार अभिमन्युको ग्रस लूँगा।। इतना कहकर उसने जोर-जोरसे गर्जना करके पुनः कुरुराज दुर्योधनसे इस प्रकार कहा--
आज मैं सुभद्राकुमार को वैसे ही ग्रस लूँगा जैसे राहु सूर्य को ग्रसता है। यह कहकर वह ऊँचे स्वर में गर्जना कर पुनः कुरुराज दुर्योधन से इस प्रकार बोला—
संजय उवाच