रथचिह्नवर्णनम् / Description of Chariot Standards and Allied Advances
तत्रारावो महानासीदेकं द्रोणं जिघांसताम् | पाण्डवानां निवृत्तानां नानावर्णह्योत्तमै:,वहाँ अनेक प्रकारके रंगवाले उत्तम घोड़ोंसे जुते हुए रथोंद्वारा एकमात्र द्रोणाचार्यको मार डालनेकी इच्छासे लौटे हुए पाण्डव-सैनिकोंका महान् कोलाहल प्रकट हो रहा था
वहाँ नाना रंगों के उत्तम घोड़ों से जुते रथों पर लौटे हुए पाण्डव-सैनिकों का, केवल द्रोणाचार्य को मार डालने की इच्छा से, महान कोलाहल उठ रहा था।
संजय उवाच