कृत्वोड्कार प्रतोदं च ब्रह्माणं चैव सारथिम् । गाण्डीवं मन्दरं कृत्वा गुणं कृत्वा तु वासुकिम्,फिर ओंकारको चाबुक, ब्रह्माजीको सारथि, मन्दराचलको गाण्डीव धनुष, वासुकिनागको उसकी प्रत्यंचा, भगवान् विष्णुको उत्तम बाण, अग्निदेवको उस बाणका फल, वायुको उसके पंख और वैवस्वत यमको उसकी पूँछ बनाया
kṛtvā oṃkāra-pratodaṃ ca brahmāṇaṃ caiva sārathim | gāṇḍīvaṃ mandaraṃ kṛtvā guṇaṃ kṛtvā tu vāsukim ||
उन्होंने ओंकार को चाबुक, ब्रह्मा को सारथि, मन्दराचल को गाण्डीव धनुष और वासुकि नाग को उसकी प्रत्यंचा बना लिया।
व्यास उवाच