कपि: श्रेष्ठ इति प्रोक्तो धर्मश्व॒ वृष उच्यते । स देवदेवो भगवान् कीर्त्यतेडतो वृषाकपि:,कपि कहते हैं श्रेष्को और वृष नाम है धर्मका। वृष और कपि दोनों होनेके कारण देवाधिदेव भगवान् शंकर *वृषाकपि” कहलाते हैं
kapiḥ śreṣṭha iti prokto dharmaś ca vṛṣa ucyate | sa devadevo bhagavān kīrtyate 'to vṛṣākapiḥ ||
‘कपि’ शब्द ‘श्रेष्ठ’ के अर्थ में कहा गया है और ‘वृष’ धर्म का नाम बताया गया है। अतः देवों के देव भगवान् शंकर, ‘वृष’ और ‘कपि’—दोनों से सूचित होने के कारण—‘वृषाकपि’ के नाम से कीर्तित हैं।
व्यास उवाच