एवमुक््त्वा तु तं॑ कृष्णो रथाद् भूमिमवर्तयत् । निःश्वसन्तं यथा नागं क्रोधसंरक्तलोचनम्,ऐसा कहकर श्रीकृष्णने क्रोधसे लाल आँखें करके सर्पके समान फुफकारते हुए भीमसेनको रथसे भूमिपर उतार लिया
evam uktvā tu taṃ kṛṣṇo rathād bhūmim avartayat | niḥśvasantaṃ yathā nāgaṃ krodha-saṃrakta-locanam ||
ऐसा कहकर श्रीकृष्ण ने उसे रथ से भूमि पर उतार लिया। वह क्रोध से लाल नेत्रों वाला, क्रुद्ध गज के समान फुफकारता हुआ, भारी-भारी साँसें ले रहा था।
संजय उवाच