तमब्रवीद् वासुदेव: किमिदं पाण्डुनन्दन । वार्यमाणो5पि कौन्तेय यद् युद्धान्न निवर्तसे
tam abravīd vāsudevaḥ kim idaṃ pāṇḍunandana | vāryamāṇo 'pi kaunteya yad yuddhān na nivartase ||
तब वासुदेव ने उससे कहा—“यह क्या कर रहे हो, पाण्डुनन्दन? हे कुन्तीनन्दन! रोके जाने पर भी तुम युद्ध से क्यों नहीं लौटते?”
संजय उवाच