तूष्णीं बभूवू राजान: सर्व एव विशाम्पते | अर्जुनस्तु कटाक्षेण जिद्दां विप्रेक्ष्य पार्षतम्
tūṣṇīṁ babhūvur rājānaḥ sarva eva viśāmpate | arjunastu kaṭākṣeṇa jiddāṁ viprekṣya pārṣatam ||
संजय ने कहा—हे प्रजानाथ! वहाँ सब राजा मौन हो गये। पर अर्जुन ने केवल टेढ़ी दृष्टि से पृषतपुत्र धृष्टद्युम्न की ओर देखा—मानो संकल्प और तत्परता का संकेत दे रहा हो।
संजय उवाच