निगृहा केशेषु वर्ध॑ गुरोर्धर्मात्मन: सतः । 'पुरुषाधम! तेरे सिवा दूसरा कौन श्रेष्ठ पुरुष धर्मात्मा सज्जन गुरुके केश पकड़कर उनके वधका विचार भी मनमें लायेगा
nigṛhya keśeṣu vṛddhaṁ guror dharmātmanaḥ sataḥ | “puruṣādhama! tere sivā dūsarā kauna śreṣṭha-puruṣa dharmātmā sajjana guru-ke keśa pakaṛakara unake vadha-kā vicāra bhī man-meṁ lāyegā” ||
संजय बोले—पुरुषाधम! धर्मात्मा, सज्जन, वृद्ध गुरु के केश पकड़कर उनके वध का विचार भी मन में तेरे सिवा दूसरा कौन श्रेष्ठ पुरुष लाएगा?
संजय उवाच