Droṇa-parva Adhyāya 2: Karṇa’s lament, vow, and battle preparation after Bhīṣma’s fall
समाहितं चात्मनि भारमीदृशं जगत् तथानित्यमिदं च लक्षये । निपातितं चाहवशौण्डमाहवे कथं नु कुर्यामहमीदृशे भयम्,“मैंने यह भार अपने ऊपर ले लिया। जब मैं यह देखता हूँ कि सारा जगत् अनित्य है तथा युद्धकुशल भीष्म भी युद्धमें मारे गये हैं, तब ऐसे अवसरपर मैं भय किस लिये करूँ?
मैंने यह भार अपने ऊपर धारण कर लिया है। जब मैं देखता हूँ कि यह समस्त जगत् अनित्य है और युद्धकुशल भीष्म भी संग्राम में गिर पड़े, तब ऐसे अवसर पर मैं भय क्यों करूँ?
संजय उवाच