चेष्टन्तो विविधाश्रैष्टा व्यदृश्यन्त महाहवे । कुरुश्रेष्ठ! बाणोंके आघातसे कटे हुए योद्धा उस महासमरमें अनेक प्रकारकी चेष्टाएँ करते और छटपटाते दिखायी देते थे
ceṣṭanto vividhāḥ śreṣṭhā vyadṛśyanta mahāhave | kuruśreṣṭha bāṇānām āghātāt kaṭitā yoddhāḥ tasmin mahāsamare nānāvidhāś ceṣṭāḥ kurvantaḥ chaṭpaṭāyanta iva vyadṛśyanta |
संजय बोले—हे कुरुश्रेष्ठ! उस महासमर में बाणों के आघात से कटे हुए अग्रणी योद्धा अनेक प्रकार की अनायास चेष्टाएँ करते, पीड़ा से छटपटाते और तड़पते हुए दिखाई देते थे।
संजय उवाच