ये नः प्राणा: शिरो ये च ये नो योधा महारथा:,“जो पुरुषशिरोमणि महारथी योद्धा हमारे प्राण और मस्तक हैं, वे ही धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ जूझ रहे हैं, फिर तुम सब लोग मूर्ख और अचेत मनुष्योंके समान यहाँ क्यों खड़े हो?
ye naḥ prāṇāḥ śiro ye ca ye no yodhā mahārathāḥ
संजय बोले—“जो हमारे प्राण हैं, जो मानो हमारा मस्तक हैं—वे ही हमारे श्रेष्ठ महारथी योद्धा धृतराष्ट्रपुत्रों से जूझ रहे हैं; फिर तुम सब मूर्ख और अचेत मनुष्यों की भाँति यहाँ क्यों खड़े हो?”
संजय उवाच