तौ परस्परमासाद्य समीपे कुरुमाधवौ । हसमानीौ नृशार्दूलावभीतौ समसज्जताम्,यह देख सात्यकि बड़ी शीघ्रताके साथ पुनः दुर्योधनके सम्मुख आ गये। वे दोनों मनुष्योंमें सिंहके समान पराक्रमी थे। कुरुवंशी दुर्योधन और मधुवंशी सात्यकि एक-दूसरेको समीप पाकर निर्भय हो हँसते हुए युद्ध करने लगे
sañjaya uvāca | tau parasparam āsādya samīpe kurumādhavau | hasamānau nṛśārdūlāv abhītau samasajjatām ||
संजय बोले—कुरुवंशी और माधववंशी वे दोनों, दुर्योधन और सात्यकि, परस्पर समीप आकर आमने-सामने हुए। मनुष्यों में सिंह के समान वे दोनों निर्भय थे; हँसते हुए ही वे एक-दूसरे पर टूट पड़े।
संजय उवाच