न सूची कपिशो नैव न गवास्थिर्गजास्थिज: । इषुरासीन्न संश्लिष्टो न पूतिन्न च जिह्यग:,न सूची*, न कपिश”, न गायकी* हड्डीका बना हुआ, न हाथीकी* हड्डीका बना हुआ, न दो फलों या काँटोंवाला, न दुर्गन्न्धयुक्त और न जिह्ाग (टेढ़ा जानेवाला) बाण ही काममें लाया जाता था
sañjaya uvāca |
na sūcī kapiśo naiva na gavāsthir gajāsthijaḥ |
iṣur āsīn na saṃśliṣṭo na pūtir na ca jihvagaḥ ||
न सूचि-शीर्ष, न कपि-अस्थि-निर्मित, न गो-अस्थि या गज-अस्थि से बना; न संयुक्त, न दुर्गन्धयुक्त, और न टेढ़ी गति वाला—ऐसा कोई बाण वहाँ काम में नहीं लाया जाता था।
संजय उवाच