द्रोणस्य सुपर्णव्यूहः — युधिष्ठिरप्रत्यव्यूहः
Droṇa’s Suparṇa Formation and Yudhiṣṭhira’s Counter-array
त॑ प्रत्यगृह्लंस्त्वरिता व्यूढानीका: प्रहारिण: । युधिष्टिरं परीप्सन्तस्तदासीत् तुमुलं महत्,व्यूह-रचनापूर्वक प्रहार करनेमें कुशल योद्धाओंने युधिष्ठिरको पकड़नेकी इच्छासे तुरंत ही उनपर चढ़ाई कर दी, वह युद्ध बड़ा भयानक हुआ
संजय बोले—व्यूह रचकर प्रहार करने में निपुण योद्धा युधिष्ठिर को पकड़ लेने की इच्छा से तुरंत ही उन पर टूट पड़े; तब घोर तुमुल युद्ध छिड़ गया।
संजय उवाच