त्वमप्याशंसये योद्धुं कुलज: क्षत्रियो हासि । इमान् कि क्षत्रियान् सर्वान् घातयिष्यस्यनागस:,“तुम भी जाओ, अपने हितके लिये कुन्तीकुमार अर्जुनको शीघ्र ही मार डालो। तुम भी तो कुलीन क्षत्रिय हो। मैं आशा करता हूँ, तुममें भी युद्ध करनेकी शक्ति है ही, फिर इन सम्पूर्ण निरपराध क्षत्रियोंको क्यों व्यर्थ कटवाओगे?
tvam apy āśaṃsaye yoddhuṃ kulajaḥ kṣatriyo hāsi | imān ki kṣatriyān sarvān ghātayiṣyasy anāgasaḥ ||
संजय ने कहा—मैं भी तुमसे युद्ध करने की आशा करता हूँ, क्योंकि तुम कुलज क्षत्रिय हो। फिर इन सब निरपराध क्षत्रियों को व्यर्थ क्यों कटवाओगे? तुम स्वयं जाओ और अपने हित के लिए कुन्तीपुत्र अर्जुन को शीघ्र मार डालो।
संजय उवाच