संजय उवाच एतच्चिकीर्षितं ज्ञात्वा कर्णस्य मधुसूदन: । नियोजयामास तदा द्वैरथे राक्षसेश्वरम्,संजयने कहा--राजन! कर्ण भी उस शक्तिसे अर्जुनका ही वध करना चाहता था। उसके इस अभिप्रायको जानकर परम बुद्धिमान् मधुसूदन भगवान् श्रीकृष्णने उस अमोघ शक्तिको नष्ट करनेके लिये ही कर्णके साथ द्वैरथ युद्धमें उस समय महापराक्रमी राक्षसराज घटोत्कचको लगाया। महाराज! यह सब आपकी कुमन्त्रणाका ही फल है
sañjaya uvāca etac cikīrṣitaṃ jñātvā karṇasya madhusūdanaḥ | niyojayāmāsa tadā dvairathe rākṣaseśvaram ||
संजय ने कहा—कर्ण की इस मंशा को जानकर मधुसूदन श्रीकृष्ण ने तब उस रथ-द्वन्द्व में राक्षसों के स्वामी (घटोत्कच) को लगा दिया, ताकि कर्ण का अमोघ अस्त्र वहीं व्यर्थ होकर नष्ट हो जाए।
संजय उवाच